इश्क़ का आखिरी सफर

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बारिश की हल्की बूंदें सड़क पर गिर रही थीं। हवा में मिट्टी की भीनी-भीनी खुशबू थी। आकाश अपनी आदत के मुताबिक किताबों की दुकान में दाखिल हुआ और दर्शन तथा इतिहास की किताबें टटोलने लगा। उसे किताबों की दुनिया में खो जाना पसंद था, क्योंकि यहाँ उसे कोई समझाने या साबित करने की जरूरत नहीं होती थी। दूसरी तरफ, सृष्टि भी वहाँ आई थी। उसे कविताएँ और प्रेम कहानियाँ बेहद पसंद थीं। उसकी नजर एक किताब पर पड़ी—गुलजार की नज़्में। उसने धीरे से किताब उठाई, लेकिन तभी दूसरी तरफ से एक और हाथ उसकी ओर बढ़ा।"ओह, सॉरी!" आकाश ने घबराते