...जुन्नूनियत..सी..इश्क.. (साजिशी इश्क़) - 19

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...!!जय महाकाल!!...अब आगे...!!सात्विक के ऐसा करने पर.....द्रक्षता आँखें मूंद चुकी थी.....वो दोनों इतने करीब थे.....जितना द्रक्षता ने कभी सोचा भी नहीं था.....सात्विक धीरे धीरे उसके बेहद करीब चला आया था.....ये पल दोनों के लिए काफी हसीन थे.....जिन में दोनों पूरी तरह डूब गए थे.....कुछ देर बाद दोनों की करीबी ने रूम का टेंपरेचर बढ़ा दिया था.....दोनों की मदहोशी भरी सांसे रूम को बहुत ज्यादा रोमांटिक बना रहा था.....अगली सुबह...!!सात्विक का रूम...!!बेड पर द्रक्षता चैन की नींद सोई हुई थी.....कल की रात उसके लिए काफी थका देने वाला था.....उसके चेहरे पर थकावट साफ झलक रही थी.....सात्विक की नींद बहुत पहले ही