महाशक्ति – नवां अध्याय: कालचक्र की परछाईअर्जुन और अनाया जैसे ही दिव्य द्वार के अंदर प्रवेश करते हैं, चारों ओर घना अंधकार छा जाता है। वे दोनों एक-दूसरे का हाथ मजबूती से थामे आगे बढ़ते हैं। यह जगह किसी दूसरी ही दुनिया की तरह लग रही थी—ना कोई दीवारें, ना छत, सिर्फ एक अनंत शून्य, जिसमें केवल एक ही चीज़ दिखाई दे रही थी—एक विशाल कालचक्र!कालचक्र का रहस्यउस दिव्य चक्र के चारों ओर कई प्रतीक बने हुए थे, और उसके केंद्र में एक धधकता हुआ प्रकाश घूम रहा था। अचानक एक गूंजती हुई आवाज़ आई—"समय से बड़ा कोई शस्त्र नहीं,