महाशक्ति - 3

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महाशक्ति – तीसरा अध्याय: आधी रात की आहटरात का सन्नाटा पूरे वातावरण में घुल चुका था। आसमान में चाँद अपनी पूरी आभा के साथ चमक रहा था, लेकिन अनाया की आँखों में नींद नहीं थी। पिछले कुछ दिनों से उसे अजीब-अजीब सपने आ रहे थे। कभी वो खुद को एक विशाल पर्वत के शिखर पर खड़ा देखती, जहाँ से तेज़ रोशनी निकल रही होती। कभी-कभी उसे ऐसा लगता कि कोई अनजानी शक्ति उसे पुकार रही है।वो समझ नहीं पा रही थी कि यह महज़ एक सपना है या कोई संकेत। लेकिन आज का सपना कुछ अलग था। उसने खुद को