(भाग 7) आज मैं क्षमा के यहीं से फ्रेश होकर आया था इसलिए आकर सीधा पैकेट बनाने बैठ गया और 9-10 बजे तक आज का सारा डिस्पैच तैयार कर लिया। क्योंकि 20 पत्रिकाओं से अधिक के पैकेट बनाना फिजूल था। इस शाखा में उस पर काम की अधिकता थी। एकल खिड़की थी- इसी पर किस्तें जमा होतीं, बिल जमा होते, आसपास के दो-तीन दफ्तरों की डाक-डिस्पैच और यहीं पर डाक सामग्री की खरीद भी। उसके सहयोग के लिए सिर्फ एक प्यून था...! तो इसी बात का ख्याल रखना था कि 20 से अधिक पैकेट न हों, नहीं तो उस पर