टूटे हुए दिलों का अश्पताल - 14

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एपिसोड 14: एक अधूरी दास्तानरात का समय था। अस्पताल के गलियारे में हल्की-हल्की रोशनी फैली हुई थी। मरीजों के वार्ड में शांति थी, लेकिन इमरजेंसी वार्ड की भागदौड़ अभी भी जारी थी। डॉक्टर आदित्य ने एक लंबी सर्जरी खत्म की थी, लेकिन उनकी आंखों में नींद का नामोनिशान नहीं था। वे केबिन में आए ही थे कि उनकी नज़र फिर से उसी चेहरे पर पड़ी, जिससे वे बचना चाह रहे थे—भावेश।भावेश अस्पताल में भर्ती था, लेकिन उसका आना सिर्फ एक इत्तेफाक नहीं था। वह आदित्य के अतीत का एक ऐसा अध्याय था, जिसे आदित्य बंद कर देना चाहता था। लेकिन