एपिसोड 36: विजय का पलटवारएक नई चुनौतीसमीरा को लगा था कि विजय की धमकियों से अब उसे छुटकारा मिल जाएगा, लेकिन वह गलत थी। पुलिस ने भले ही विजय की करतूत को पकड़ लिया था, लेकिन अब वह पहले से भी ज्यादा खतरनाक हो गया था।रात को करीब ग्यारह बजे समीरा के फोन पर फिर से एक अनजान नंबर से कॉल आया।"हैलो?""तुम सोच रही थी कि मैं हार मान जाऊँगा?"समीरा के रोंगटे खड़े हो गए। यह वही आवाज़ थी—विजय की।"तुम जेल में हो, फिर भी तुम...""तुम्हें क्या लगा, समीरा? मैं अंदर हूँ तो कुछ नहीं कर सकता? तुम मुझे कमजोर