भाग 2: सामाजिक और सांस्कृतिक संदर्भकामसूत्र को केवल शारीरिक संबंधों के बारे में नहीं समझा जा सकता। इसका उद्देश्य जीवन के विभिन्न पहलुओं को समझाना है, जिसमें प्रेम, संबंध, सामाजिक जिम्मेदारी और व्यक्तिगत संतुलन शामिल हैं। महर्षि वात्स्यायन ने इसे एक संस्कृति और समाज के संदर्भ में प्रस्तुत किया है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि शारीरिक संबंधों के साथ-साथ हमारी सामाजिक और सांस्कृतिक जिम्मेदारियाँ भी महत्वपूर्ण हैं। इस भाग में हम यह जानेंगे कि कैसे कामसूत्र हमारे सामाजिक जीवन, विवाह और रिश्तों के मानकों से जुड़ा हुआ है और इसके द्वारा जीवन में संतुलन कैसे बनाए रखा जा सकता