70=== लिखते-लिखते अनन्या की कलम रुक गई| कमाल ही थी वह?उसने सोचा जो वह आजकल अक्सर सोचने लगती थी कि आखिर वह किस बलबूते और अधिकार से मनु को अपने पिता की सार-संभाल के लिए कहकर आई थी?मन कभी भी धड़कने लगता लेकिन वह जैसे अपने मन को मुट्ठी में भींच लेती| उसके मन से रक्त टपकने लगता जैसे लेकिन स्वीकार करना तो उसने कभी जाना ही नहीं था | उसे पता तो चल ही गया था कि मनु अनन्या के साथ बहुत घुल-मिल गया था लेकिन न जाने कैसे अनन्या के गर्भ का उसे अभी तक कैसे पता नहीं