शून्य से शून्य तक - भाग 67

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67=== व्यवसाय के प्रति सब ईमानदार थे और काम ठीक चल रहा था| अनन्या ने बखूबी मनु के साथ मिलकर काम संभाल लिया था| उसके काम का और मीठे स्वभाव का जादू सब पर चल गया था| वह कितनी सादी, सरल, सहज और काम के प्रति समर्पित लड़की थी कि सब लोग उसकी प्रशंसा करते हुए नहीं थकते थे| जिसको भी कोई जरूरत होती, वह उसके साथ खड़ी मिलती| आवश्यकता होने पर सबके काम में सहायता कर देती| अपना डिवीज़न तो उसने बखूबी संभाल ही लिया था|  दीना जी के पास अब न कुछ समझने को था, न कहने को