मांझी - 1

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एक सीधा साधा होनहार युवा कल्पनाओं के पंख लगाकर जिंदगी की यात्रा में बढ़ रहा था। वक्त बिता माहौल बदला कल्पनाएं अपने अस्तित्व को खोने लगीं। वास्तविक चीजें धीरे धीरे उसकी जिंदगी का हिस्सा बनने लगीं। वो योग्य तो था परंतु कोई आमदनी हेतु रोजगार नही था जीवनयापन करने को ये परम् अवश्य है। अपने बल पर खड़े होने की ये शुरुआत थी उसे पूर्ण विश्वास था कि एक दिन वो बहुत सफल व्यक्ति बन जायेगा और एक खुशहाल जिंदगी जिएगा। इसी बीच उसकी भेंट एक लड़की से हुई। ये