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इश्क और अश्क - 85

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धागा टूटा।और उसी पल —कनिष्क हँसा।इतने ज़ोर से।इतनी खुशी से।जैसे सालों से कोई चीज़ चाहता था — और आज ...

इश्क और अश्क - 84

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  • 453

शहनाई अभी भी बज रही थी।किसी को ख़बर नहीं थी कि रोकें।बाहर ढोल था। हँसी थी। फूल थे।लगता है ...

इश्क और अश्क - 83

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  • 681

मंत्रों की आवाज़ महल में गूँज रही थी।धीमी। गहरी।हर शब्द जैसे हवा में घुल रहा हो — पर प्रणाली ...

इश्क और अश्क - 82

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  • 618

दूल्हे राजा... बहुत जच रहे हो।”अविराज ने पलटकर देखा।कनिष्क।दरवाज़े पर टिका हुआ… बाँहें सीने पर…चेहरे पर वही मुस्कान — ...

इश्क और अश्क - 81

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  • 800

वर्धान ने द्वार पर दस्तक दी।"आइए।"शोभित खिड़की के पास खड़े थे। सुबह की पहली रोशनी उनके सफ़ेद पंखों पर ...

इश्क और अश्क - 80

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तलवार अभी भी वर्धान की गर्दन पर थी।पारस की आँखें — गुस्से से भरी।वर्धान ने हिलने की कोशिश नहीं ...

इश्क और अश्क - 79

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पारस चुपचाप बैठा रहा।प्रणाली के रोने की आवाज़ धीरे धीरे शांत हो रही थी।कितनी देर बाद —उसने अपना सिर ...

इश्क और अश्क - 78

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"वर्धान — छोड़ो उसे!"सायूरी आ गई थी।उसने दोनों को अलग किया — वर्धान को पीछे खींचा, कनिष्क को छुड़ाया।कनिष्क ...

इश्क और अश्क - 77

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गरुड़ लोक में शाम उतर रही थी।सुनहरी रोशनी धीरे धीरे फीकी पड़ रही थी — आसमान में बादल थे ...

इश्क और अश्क - 76

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वर्धान अपनी नम आंखों और दुनिया जीत लेनी वाली मुस्कान से : मै......और फिर —कुछ याद आया।अचानक।जैसे किसी ने ...