Quotes by Urvashi Oza in Bitesapp read free

Urvashi Oza

Urvashi Oza

@urvashioza254340


હા, થઈ જઈશ હું પત્થર એક દિવસ
નઈ ફેર પડે મને તમારી લાગણી થી

I want myself back
I'm tired of being mature

कुछ लोग आपको चाहे जितना भी सुना दे
उनसे नफ़रत नहीं हो पाती

Do You know how it feels ?
खुद को कोसना & at the same time खुदको बेचारा फील करना..

क्यों हर रिश्ता खराब जाता है मुझसे
खुद को पूरा पूरा झोंक देने के बाद भी


why....

सो काम होते हुए भी मैं ही क्यों एक बेकार हु
क्यों भटकती रहती हु किसी की तलाश में

अल्काजी की आवाज पर झूमने वाली मैं ,
जगजीतजी को सुनकर रिलेट करती रहती हूं

दिल करता है एक रात मैं सोजाउ
और सुबह सबको मेरे लिए रोते देखू

( आसमान से )

मैं पेड़ से गिरे हुए उस पत्ते की तरह हु जो सूखा भी है और हरा भी
ना चूर हो सकता है ना तो पेड़ से लग सकता है

( बस ज़मीन पर पड़े रहना ही किस्मत है )

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કદાચ હું નતી બોલતી એજ સારું હતું , હું કદાચ વાત કરતા શીખી જ નથી

કંઈ વધારે જ થઈ જાય છે