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Rajesh Pali

Rajesh Pali

@rajeshpali.839304


तू आसपास है मेरे,
पर कहाँ निहारुँ,
तू धूप है लेकिन,
तुझे अपनाऊँ कैसे,
तू आदत है मेरी,
तुझे भूलूँ कैंसे,
तू ज़िन्दगी है,
तुझ बिन रहूँ कैसे।

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फिर तुम्हारी याद
मुझसे लिपट रही है,
फिर मुझे बेचैन कर दिया,
मेरी रूह तड़पने लगी है।
मेरा चैन -ओ -सुकूँ गायब है।
मैं हरपल तुझे ही सोचता हूँ,
मगर तुम मुझे याद भी न करती होगी,
अपने में ही ख़ुश हो तुम।
किसी से क्या शिकायत करूँ,
मैं पागल हो गया हूँ, हाँ! मैं पागल हो गया हूँ।

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तुमको पाना फिर खो देना,
क्या -क्या होता है।
इश्क़ में इंसान
पल - पल रोता है।

न कुछ कहना, न कुछ सुनना।
कैसा पागलपन है।
मन की बातें मन ही जाने,
मन तो आखिर मन है।

टूटे सपने किसे दिखाते,
मन ही मन कब तक पछताते।
सबकुछ पीछे छूट गया है।
अपना कोई रूठ गया है।
कैसे उसे मानते।