Quotes by pradeep Kumar in Bitesapp read free

pradeep Kumar

pradeep Kumar

@pradeepkumar.355766


दिल के ज़ख़्मो को इतनी सादगी से छुपाए रखा है
कितनी चालाकी से हँसी को लबों से लगाए रखा है,

और एक रंग है जो बिखरा हुआ है अंदर कहीं
ये और एक रंग है जो चेहरे पर सजाए रखा है,

हरेक कश के साथ कितनी बातों का दम घुटता होगा
कितने सलीके से सिगरेट को होंठो से दबाए रखा है,

क्या ख़ता है कि किसी ने किसी से मुहब्बत कर ली
क्यों शहर के तमाम लोगो ने शोर मचाए रखा है,

तुम जो आओगे कभी तो घर मे रौशनी होगी
इसी उम्मीद में सभी चरागों को बुझाए रखा है,

एक झलक कि प्यास है फिर तो बरस वियोग
ये क्या सितम है कि उसने मुझें भुलाए रखा है।

प्रदीप

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