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Narendra Pratap Singh

Narendra Pratap Singh

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चॉक और बोर्ड


एक दिन शिक्षक कक्षा में पढ़ाने गए। वो चॉक से बोर्ड पर कुछ लिखने को हुए , पर चॉक तो बोर्ड पर चली नहीं । शिक्षक ने सभी चॉक के टुकड़ों का प्रयोग किया। पर नतीजा वही । हैरान शिक्षक ने एक चॉक के टुकड़े से पूंछा,"क्या हुआ ? आज बोर्ड पर चल क्यों नहीं रही ? " चॉक ने कहा ,"आज मेरी बोर्ड से लड़ाई हो गयी।" शिक्षक ने पूंछा," क्यों ? " चॉक बोली ," मैं कहती ,मैं श्रेष्ठ हूँ और बोर्ड कहता कि वो श्रेष्ठ है। अब आप ही बताएं मेरा क्या मुकाबला इस भद्दे से बोर्ड से ?" 

शिक्षक ने दोनों से कहा ," अपने अपने गुण बताओ।" 

पहले चॉक बोली ," मेरे बिना इसका कोई वजूद नहीं, अगर मैं ना होती तो इसे कोई पूछे भी नहीं। मैं अपने अनेक रंगों से बोर्ड का श्रृंगार करती हूँ। मेरे रंगों से ही इसे पहचान मिलती है। वरना ये है क्या , एक बदसूरत शक्ल के अलावा।"

बोर्ड बोला , "चॉक को अपने रंगों पर बड़ा घमंड है। इसे नहीं पता कि अगर मैं बदसूरत ही ना होता , तो ये अपनी योग्यता किस पर दिखाती ? मेरे काले रंग पर ही इसके रंगों की मुस्कान झलकती है।"

शिक्षक में दोनों को समझाते हुए कहा ," तुम दोनों ही श्रेष्ठ हो और एक के बिना दूसरे का अस्तित्व नहीं है। अगर तुम दोनों यूँ ही झगड़ते रहे तो अपनी अपनी योग्यता खो दोगे। एक दूसरे का सम्मान करना सीखो।


शिक्षक के समझाते ही चॉक बोर्ड पर नाचने लगी।


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