Quotes by Jaya Sharma in Bitesapp read free

Jaya Sharma

Jaya Sharma

@jayasharma


सुरमई साबन की फुहारें आ गईं सूने जीवन में बहारें आ गई तुम न आ पाये तो क्या मिल जो न पाये तो क्या . यादें बन बूंदों की धारें आ गई मस्त झूलों की मल्हारें आ गई ।

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शांत झील में फेंक के कंकड़ जल को तरंगें दे डाली हैं थाम के रखना पागल मन को कोई सैलाब न आने पाऐ .

घर बनाने की बात करते है . आशियाने की बात करते हैं आसमां भी यहाँ तो मंहगा है छत बनाने की बात करते हैं।

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खेल रही है किस्मत हमसे कैसे कैसे खेल निराले शायद उसके पास बचे होंगे न बाकी पन्ने काले