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Tanveer Gohil

Tanveer Gohil

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हाँ!
मैं बदल गई, अच्छा बनते बनते थक गई,
रिश्तों की डोरी एक हाथ से खिंचते खिंचते,
मेरी उंगलियां अकड़ गई,
हाँ!
मैं बदल गई ,,,
देती रही तुम्हे लाखो आवाज़,
लेकिन तुम्हारे कान
जब बन्द पड़े मिले मुझे तो फिर मैं उस गली से ही निकल गई,
रोजाना इंतजार होता था ,,
एक फोन जो सिर्फ मेरे लिये होता था पहले,
वो जब सालों से नहीं आया तो फिर मैं भी तड़प के साथ बदल गई,,

करती थी जो इंतजार सांसों की गहराइयों से तेरे मिलने का ,
आज मौत का इंतजार करती है ,
हां !
आज मैं बदल गई,,
हाँ!
मैं बदल गई, अच्छा बनते बनते थक गई,
मन ही मन इल्जाम लगाये होंगे तुमने मुझपे,
मग़र मेरे दर्द को कभी नहीं पढ़ा होगा तुमने,,

एक ऐसी किताब सीने से लगाई थी तुमने,
जिसका एक भी अक्षर सही ढंग से क़भी नहीं पढ़ा तुमने....
बेवफा तो बड़ी आसानी से कह देते है लोग,
लेकिन ये कोई नहीं देखता एक तरफ वादें निभाते निभाते एक इंसान भी तो थक गया....!!
हाँ !
मैं बदल गई,
अच्छा बनते बनते थक…गई......
सिर्फ तुम्हारी थी
जो कभी,
वो आज खुद की भी नहीं रही आज वो बदल गई 💔
अच्छा बनती बनती आज बुरी बन के बदल गई!!!

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