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Rashid Nalandvi

Rashid Nalandvi

@bihar
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उसे ये गुमान था कि अंधेरे में हो तुम
मुझे यकीं है कि जुगनू यहीं से चमकेगा

हँसी आती है मुझे, ऐसे हसद करने वालो से,
जिनकी ज़िन्दगी डूब रही खुद की अमालो से,

वो क्या नसीहत करेगा आज मेरी आबरू की,
जिसकी खुशियाँ मुद्दतो कैद है मेरी सवालो से

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धड़कते दिलों ने इशारों मे मुझ से बस यही कही है
मंज़िल भटक गए हो तुम, लेकिन तेरे रस्ते सही है

vatan ki mohabbat