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Bhargav

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@bhargav5688


उसके साथ रहते रहते हमे चाहत सी हो गयी,
उससे बात करते करते हमे आदत सी हो गयी,
एक पल भी न मिले तो न जाने बेचैनी सी रहती है,
दोस्ती निभाते निभाते हमे मोहब्बत सी हो!


🌹🖤🌹

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कोई आदत, कोई बात, या सिर्फ मेरी खामोशी,
कभी तो, कुछ तो, उसे भी याद आता होगा।

खरीद लेंगे सबकी सारी उदासियाँ दोस्तों,
सिक्के हमारे मिजाज़ के, चलेंगे जिस रोज।

जमाल-ए-यार को देखा फिर अपने हाल को देखा,
जब अपने हाल को देखा बहुत बेहाल सा देखा।

आज ना पूछो मुझसे मेरी उदासी का सबब,
बस सीने से लगा कर काश रूला दे कोई।

जो हो सके तो चले आओ आज मेरी तरफ़,
मिले भी देर हो गई और जी भी उदास है।

एक बार देख तो लेते आँखों की उदासियाँ,
मेरी मुस्कराहट से तुम क्यूँ फरेब खा गए।

ये आरज़ू थी कि ऐसा भी कुछ हुआ होता,
मेरी कमी ने तुझे भी रुला दिया होता,
मैं लौट आता तेरे पास एक लम्हे में,
तेरे लबों ने मेरा नाम तो लिया होता।

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छूटा जो तेरा हाथ तो हम टूट के रोये,
तुम जो ना रहे साथ तो हम टूट के रोये,
चाहत की तमन्ना थी और ज़ख़्म दिए तुमने,
पायी जो यह सौगात तो हम टूट के रोये।

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हुस्न वालों ने क्या कभी की ख़ता कुछ भी?
ये तो हम हैं सर इलज़ाम लिये फिरते हैं।