इतना था तुमसे कहना,
कान्हा, तुम बिना बताए चले गए कहाँ।
कहाँ-कहाँ न ढूँढा तुम्हें,
हर राह, हर मोड़ पर पुकारा तुम्हें।
जहाँ कोई नहीं गया,
वहाँ भी तलाशा तुम्हें।
मुरली की धुन सुनने को तरसे नयन,
हर पल याद किया तुम्हें।
कान्हा, लौट आओ एक बार,
तुम बिन सूना है मेरा संसार।