धृतराष्ट्र की सभा में
जब सभी मौन धारण कर लें,
तब महाभारत का आरंभ सुनिश्चित हो जाता है।
ज्ञान और धर्म,
तप और शौर्य,
क्षमा और दान,
नीति और व्यवहार,
पुरुषार्थ के समस्त प्रयास—
सब व्यर्थ हो जाते हैं।
जब सत्य की रक्षा में
कोई स्वर नहीं उठता,
तब महाभारत का रण
स्वयं सुसज्जित हो जाता है।
- Anant Dhish Aman