फिर वही...(छोटी सी परी के नाम)
सुबह है... सुबह है...
फिर वही... सुबह है...
और फिर वही... हम दो...
हूँ... हूँ... हा... हा...
इस खूबसूरत सी... सुबह में...
तेरा मेरा यूँ... मिलना...
मुस्कुराते चेहरों के साथ...
एक दूजे में यूँ... खो जाना...
(खो जाना... आ... आ... आ...)
मासूम सा है... चेहरा तेरा...
देखूँ तो धड़कन... ठहर जाए...
(ठहर जाए... ए... ए... हे...)
पानी से नाज़ुक... ये सपने...
पलकों के किनारों पे... थम जाएँ...
(थम जाएँ... ए... ए... हे...)
तू इन्हें अपनी... आँखों में...
ज़रा धीरे से... थामे रखना...
दुनिया का कोई... साया भी...
इन तक पहुँच... न पाए...
फिर वही...
सुबह है... सुबह है...
फिर वही... सुबह है...
और फिर वही... हम दो...
हूँ... हूँ... हा... हा...
DHAMAK