Pahli Baar..... Tum - Part 2 in Hindi Love Stories by Priyam books and stories PDF | Pahli Baar..... Tum - Part 2

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Pahli Baar..... Tum - Part 2


उस एक मुलाक़ात ने जैसे लड़की की दुनिया में एक धीमी-सी रोशनी भर दी थी।

वो बदलना नहीं चाहती थी… पर बदल रही थी।


अब जब भी लाइब्रेरी में जाती,

वो किताबें कम, उसकी यादें ज़्यादा ढूंढती।

उसकी छोटी-छोटी बातें,

उसकी नजरों की direction,

उसकी चाल, उसकी style,

सब जैसे उसके दिमाग में calmly बसते जा रहे थे—

बिना किसी permission के।


और ये सब इतना natural लग रहा था

कि लड़की खुद भी नहीं समझ पा रही थी

कि ये दोस्ती थी, आदत थी…

या कुछ ऐसा था जो नाम लेने से भी डराता है।


💗 धीरे-धीरे… An Unsaid Bond

दिन बीतते जा रहे थे,

लेकिन हर दिन की शुरुआत बस इसी उम्मीद से होती—

"आज वो मिलेगा?"


कभी-कभी लड़की खुद से fights करती—

“मुझे इससे क्या फर्क पड़ता है?”

पर दिल हर बार फुसफुसाता—

“पड़ता है… बहुत ज़्यादा।”


कभी वो canteen में एक तरफ बैठकर pretend करती

कि वो casually इधर-उधर देख रही है,

लेकिन असल में उसकी नज़रें

बस उसी की direction में घूमती रहतीं।


और मज़े की बात—

लड़का भी उसकी आँखों की चोरी को notice करता था,

लेकिन कभी मुस्कुराने के अलावा

कुछ कहता नहीं था।


💗 Missing… The Beginning of Feelings

फिर एक सुबह सब बदल गया।


लाइब्रेरी में usual hush-hush था,

लड़की अपनी किताबें ले आई…

उसकी favorite खिड़की वाली seat पर बैठ गई…

दिल ने धीरे से कहा—

“Shayad aaj late आएगा।”

पर घंटा बीत गया,

फिर दो घंटे…

फिर पूरा दिन।


और जब वह पूरे दिन नहीं आया,

तो लड़की के चेहरों पर जो हल्की उदासी आई,

वो खुद उसने भी notice नहीं की—

पर उसके दिल ने ज़रूर महसूस की।


उस रात पहली बार उसने सोचा—

किसी की कमी इतनी महसूस क्यों हो रही है

जो officially अभी उसका कुछ भी नहीं है?


💗 The Silent Ache (तीन दिन)


तीन दिन तक वो नहीं आया।

और उसके बिना लड़की को लगा

जैसे लाइब्रेरी में आवाज़ें बदल गई हों,

जैसे हवा में एक खालीपन हो,

जैसे वो सीट… उसे चिढ़ा रही हो—

“देखो… आज भी वो नहीं आया।”


वो खुद को समझाती—

“He might be busy.”

“He might be unwell.”

“He might just not want to come.”


लेकिन दिल हर excuse से लड़ता—

“No… kuch toh baat hai।”


तीन दिन लड़क़ी ने जाना…

किसी के ना होने से भी

कितनी आवाज़ें पैदा हो जाती हैं।


💗 His Return… A Scene She’ll Never Forget


तीसरे दिन की शाम।

बारिश की खुशबू हवा में तैर रही थी।

लड़की लाइब्रेरी से बाहर निकलने वाली थी

कि किसी की धीमी, गहरी आवाज़

उसके कदमों को रोक गई—


“Tumhare bina kitabें khaamosh lag rahi thi…”


वो मुड़ी।

और तीन दिन की बेचैनी उस एक पल में पिघल गई।


वो वहीं था।

जैसे तीन दिन पहले गया ही न हो।


थोड़ा थका हुआ,

पर आँखों में वही softness

जो लड़की तीन दिन से ढूंढ रही थी।


वो उसके पास आया,

बहुत धीरे, बहुत संभलकर—

जैसे डरता हो

कि कहीं ये पल खत्म न हो जाए।


“Teen din ke liye gaya tha…

par wapas aate hi pata nahi kyun,

sabse pehle tumhari yaad aayi.”


ये बात simple थी।

लेकिन उसकी voice में जो सच्चाई थी…

उसने लड़की के दिल को softly पकड़ लिया।


💗 Beginning of Their “Something More”


उस दिन पहली बार वो देर तक साथ बैठे।

किताबें खुले हुए थीं,

पर पढ़ कोई नहीं रहा था।

दोनों बस एक-दूसरे को चुपचाप observe कर रहे थे।


बड़ी random बातें हुईं—

उसकी favourite chai,

उसके favourite books,

उसकी handwriting…

उसकी मुस्कान।


लड़का बीच में हँसकर बोला—

“Tum jitna sochti ho…

utni ही खूबसूरत दिखाई देती हो।”


लड़की का दिल उस पल warmth से भर गया।

किसी ने पहली बार

उसकी सोच को compliment किया था,

उसके चेहरे को नहीं।


💗 Slowly… Love Begins Like Air


अब दोनों की मुलाक़ातें scheduled नहीं थीं,

लेकिन होती जरूर थीं।


कभी लाइब्रेरी में

एक ही किताब के दो अलग chapters पढ़ते हुए।

कभी canteen में

एक ही table पर दो chai share करते हुए।

कभी corridors में

एक-दूसरे को देखकर बस smile करते हुए।


और लड़की हर दिन सोचती—

“अगर ये प्यार नहीं…

तो और क्या है?”


“Usne kuch kaha nahi,

Maine kuch maanga nahi…

Par hawa ke jhonke ne

Dono ke dil ka raaz

Humein pehle hi bata diya.”


— END OF PART 2