Pahli Baar..... Tum

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लाइब्रेरी हमेशा से उसकी पनाहगाह थी—एक ऐसी जगह जहाँ किताबों की ख़ामोशी में उसे अपनी धड़कनों की आवाज़ भी धीमी लगने लगती थी, और जहाँ वो अपने डर, अपनी हिचक, और अपनी छोटी-छोटी कमियों को दुनिया से छुपाकर कुछ देर के लिए भूल सकती थी। लेकिन उस दिन… उसकी ये ख़ामोशी अचानक टूट गई। वो ऊपर वाली शेल्फ से अपने नोट्स निकालने की कोशिश कर रही थी। उंगलियाँ पहले ही घबराहट से थरथरा रही थीं, और पन्नों के किनारे उसके हाथों की कंपकंपी को जैसे चुपचाप देख रहे थे। और फिर—

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Pahli Baar..... Tum - Part 1

लाइब्रेरी हमेशा से उसकी पनाहगाह थी—एक ऐसी जगह जहाँ किताबों की ख़ामोशी में उसे अपनी धड़कनों की आवाज़ भी लगने लगती थी, और जहाँ वो अपने डर, अपनी हिचक, और अपनी छोटी-छोटी कमियों को दुनिया से छुपाकर कुछ देर के लिए भूल सकती थी।लेकिन उस दिन… उसकी ये ख़ामोशी अचानक टूट गई।वो ऊपर वाली शेल्फ से अपने नोट्स निकालने की कोशिश कर रही थी।उंगलियाँ पहले ही घबराहट से थरथरा रही थीं, और पन्नों के किनारे उसके हाथों की कंपकंपी को जैसे चुपचाप देख रहे थे।और फिर—धड़ाम…!उसके हाथ से सारी किताबें फिसलकर ज़मीन पर गिर पड़ीं।पूरी लाइब्रेरी में एक पल ...Read More

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Pahli Baar..... Tum - Part 2

उस एक मुलाक़ात ने जैसे लड़की की दुनिया में एक धीमी-सी रोशनी भर दी थी।वो बदलना नहीं चाहती थी… बदल रही थी।अब जब भी लाइब्रेरी में जाती,वो किताबें कम, उसकी यादें ज़्यादा ढूंढती।उसकी छोटी-छोटी बातें,उसकी नजरों की direction,उसकी चाल, उसकी style,सब जैसे उसके दिमाग में calmly बसते जा रहे थे—बिना किसी permission के।और ये सब इतना natural लग रहा थाकि लड़की खुद भी नहीं समझ पा रही थीकि ये दोस्ती थी, आदत थी…या कुछ ऐसा था जो नाम लेने से भी डराता है। धीरे-धीरे… An Unsaid Bondदिन बीतते जा रहे थे,लेकिन हर दिन की शुरुआत बस इसी उम्मीद से ...Read More