उसने सुबह सिर्फ इतना लिखा, आज 5 बजे, वहीं मिलते हैं।कोई इमोजी नहीं, कोई 'जान' नहीं, कोई फालतू डॉट भी नहीं। तीन साल में पहली बार उसका मैसेज इतना खाली लगा। मैं काफी देर स्क्रीन देखता रहा। फिर बस 'ठीक है' टाइप करके भेज दिया। उसी पल समझ आ गया था, आज आखिरी बार है।हमारा प्यार फिल्मों जैसा नहीं था। न पहली नजर वाला ड्रामा, न बारिश में भीगना। मथुरा की कोचिंग वाली गली में शुरू हुआ था, जहाँ दस रुपये की कुल्हड़ चाय मिलती थी और समोसे अखबार के टुकड़े पर रखकर दिए जाते थे। वो मैथ्स के नोट्स