उस एक मुलाक़ात ने जैसे लड़की की दुनिया में एक धीमी-सी रोशनी भर दी थी।वो बदलना नहीं चाहती थी… पर बदल रही थी।अब जब भी लाइब्रेरी में जाती,वो किताबें कम, उसकी यादें ज़्यादा ढूंढती।उसकी छोटी-छोटी बातें,उसकी नजरों की direction,उसकी चाल, उसकी style,सब जैसे उसके दिमाग में calmly बसते जा रहे थे—बिना किसी permission के।और ये सब इतना natural लग रहा थाकि लड़की खुद भी नहीं समझ पा रही थीकि ये दोस्ती थी, आदत थी…या कुछ ऐसा था जो नाम लेने से भी डराता है। धीरे-धीरे… An Unsaid Bondदिन बीतते जा रहे थे,लेकिन हर दिन की शुरुआत बस इसी उम्मीद से