अंधेरी गुफा - 7

अंधेरी गुफ़ा – भाग 7 : सिसकियों की गूंज (पूर्ण संस्करण)रात फिर से उतर आई थी।गाँव पर वही सन्नाटा छाया था, जैसे सब कुछ किसी अनदेखे डर के नीचे दबा हो।मंदिर की दीवार पर जो शब्द “वह लौट आई है” उभरे थे, अब पूरी तरह मिट चुके थे।पर हवा में अब भी वही नमी थी — और वही गंध, जैसे किसी जले हुए फूल की।ललिता उस रात के बाद से कहीं दिखाई नहीं दी।लोग कहते थे, वह गुफ़ा में चली गई थी और कभी वापस नहीं लौटी।पर हर अमावस की रात, मंदिर के पीछे से किसी औरत की धीमी सिसकियाँ