खुश और चंचल मन था,
पर क्या करें वो बचपन था,
गुड्डे गुड़ियों का खेला,
और वो आम के बाग में झूला,
साइकिल पर गांव का चक्कर लगाना,
और वो टायर को लुढ़काना,
दौड़ धूप, हंसना, हंसाना,
धूल में सन जाना,
और धूप में खिल जाना,
कितना सुंदर वो जीवन था,
पर क्या करें वो बचपन था.....
-MUKESH JHA